निर्भय निरापद होकर कहता है l इसमें न अनुमान न प्रमाण न प्रमेय l जिसको कहा गया है
व्याख्या में अन्य प्रश्न संदर्भो पर भी यथावसर विचार किया गया है l अघावधि प्राप्य पुस्तकों का सारतत्व निहित करने का प्रयास किया गया है जिससे प्रस्तुति स्वयं परिपूर्ण व् अधिक उपयोगी सिद्ध हो सके l
लड़ाई एवं अन्य विवादों से हारजीत विचार अचानक लाभ योग प्रवास से निवृति और विदेश में मृत्यु योग रोग - विचार - रोग की वृद्धि और समाप्ति
शुक्र का विशेष प्रभाव : शुक्र सर्वाधिक बली होने पर जातक के जीवन पर २४वें और २८वें वर्ष में विशेष प्रभाव डालता है l यदि इस अवधि में दशा व् अन्य ग्रह स्थितियाँ भी अनुकूल हो
वस्तुपरक सत्ता के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं को तो प्रामाणित किया जा सकता है
Shri Ramcharitmanas Ramayan - Sampoorn 8 Khand, Doha, Chaupayi, Kshepak Sahit [Hindi] Vastukalpalata [Hindi] निर्भय निरापद होकर कहता हैShri Ramcharitmanas Ramayan Sampoorn 8 Khand, Doha, Chaupayi, Kshepak Sahit [Hindi] Publisher: DPB Publication